सरोगेसी से पैदा हुआ बच्चा बॉयोलॉजिकल तौर पर कपल से जुड़ा होता है

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि सरोगेसी कानून में यह प्रावधान किया गया है कि किराये पर कोख देने वाली महिला यानी जो सरोगेट मदर है वह इस प्रक्रिया के तहत पैदा होने वाले बच्चे से बॉयोलॉजिकल तौर पर जुड़ी नहीं है। केंद्र सरकार ने इस कानून के बारे में स्पष्टीकरण में बताया कि जो बच्चा सरोगेसी से पैदा होता है वह बॉयोलॉजिकल तौर पर उसे पाने वाले कपल या इच्छुक महिला जो विधवा या तलाकशुदा हो उससे जुड़ा होना चाहिए।
सरोगेसी रेग्युलेशन एक्ट 2021 और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी रेग्युलेशन एक्ट 2021 के कुछ प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इन याचिकाओं में कहा गया है कि यह प्रावधान निजता के अधिकार के खिलाफ है, साथ ही महिलाओं के प्रजनन अधिकारों के खिलाफ है। भारत में आधिकारिक तौर पर सरोगेसी को रेग्युलेट करने के लिए नया कानून बनाया गया है।




