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डिफेंस सेक्टर में अनिल अंबानी की कंपनी शुरू कर रही है काम, तोप-गोले से है संबंध

नई दिल्‍ली: अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस ने बड़ा कदम उठाया है। उसने जर्मनी की हथियार कंपनी राइनमेटल एजी के साथ समझौता किया है। यह समझौता महाराष्ट्र में बनने वाले कारखाने से तोप के गोले और गोला-बारूद जैसे विस्फोटक सप्लाई करने के लिए है। इस साझेदारी का लक्ष्य भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। साथ ही, भारत को दुनिया के बड़े हथियार निर्यातकों में शामिल करना है। यह चीन पर लगातार निर्भरता बढ़ा रहे पाकिस्‍तान की नींद उड़ाएगा।

रिलायंस डिफेंस ने इस समझौते के बारे में एक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की कंपनी रिलायंस डिफेंस और जर्मनी की राइनमेटल एजी ने गोला-बारूद के क्षेत्र में हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह रिलायंस समूह का तीसरा बड़ा रक्षा समझौता है। इससे पहले, कंपनी ने दसॉ एविएशन और फ्रांस की थेल्स के साथ भी साझेदारी की है। बयान में यह भी बताया गया है कि रिलायंस राइनमेटल को मध्यम और बड़े कैलिबर के गोला-बारूद के लिए विस्फोटक और प्रॉपलेंट देगी। दोनों कंपनियां मिलकर अपने उत्पादों का प्रचार भी करेंगी। वे भविष्य में और भी क्षेत्रों में साथ काम कर सकती हैं।

भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता में होगा इजाफा

यह साझेदारी भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देगी। इससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। सरकार चाहती है कि भारत रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने और दुनिया को हथियार बेचे।

इस नई साझेदारी से रिलायंस डिफेंस को देश के टॉप तीन हथियार निर्यातकों में शामिल होने में मदद मिलेगी। कंपनी का लक्ष्य है कि वह भारत से सबसे ज्यादा हथियार बेचने वाली कंपनियों में से एक बने।

रिलायंस डिफेंस के अनुसार, ‘रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की ओर से प्रवर्तित रिलायंस डिफेंस लिमिटेड (रिलायंस डिफेंस) और डसेलडोर्फ स्थित राइनमेटल एजी ने गोला-बारूद के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी पर सहमति व्यक्त की है। इस आशय के एक समझौते पर अब दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए।’ इसका मतलब है कि दोनों कंपनियां मिलकर गोला-बारूद बनाएंगी और बेचेंगी।

यह समझौता भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे भारत की सेना और भी शक्तिशाली होगी। साथ ही, देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा। पाकिस्तान के साथ चल रहे तनाव के बीच यह डील कई तरह से महत्वपूर्ण साबित होगा।

क्‍या हैं इस डील के मायने?

यह समझौता भारत की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जब घरेलू कंपनियां तोप के गोले और विस्फोटक जैसी महत्वपूर्ण सैन्य सामग्री का उत्पादन करती हैं तो आयात पर निर्भरता कम होती है। पाकिस्तान के साथ तनाव की स्थिति में यह आत्मनिर्भरता सप्‍लाई चेन को सुरक्षित करती है। इसके उलट पाकिस्‍तान को इस जरूरी सेक्‍टर में चीन पर निर्भर ही रहना होगा।

घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से भारत को सैन्य तैयारियों के मामले में रणनीतिक बढ़त मिलती है। जरूरत पड़ने पर गोला-बारूद और विस्फोटकों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। इससे किसी भी संभावित संघर्ष में बेहतर प्रतिक्रिया दी जा सकती है।

इस तरह के सौदे से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलता है। रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलती है। जर्मन कंपनी राइनमेटल (Rheinmetall) रक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी है। इस समझौते के जरिये रिलायंस डिफेंस को उनकी उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। इससे उत्पादित गोला-बारूद की क्‍वालिटी और क्षमता बेहतर होगी।

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