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तेलंगाना में इस महीने बीजेपी करेगी धुआंधार सभाएं, हर बूथ पर होगा वोटर्स कनेक्‍ट

नई दिल्ली:तेलंगाना में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन बीजेपी ने प्रचार का टैंपो हाई रखा है। बीजेपी तेलंगाना में 11 हजार स्ट्रीट कॉर्नर मीटिंग कर चुकी है और अब हर विधानसभा में बड़ी सभा करने की तैयारी है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और तेलंगाना प्रभारी तरुण चुग ने बताया कि हमने तेलंगाना की हर विधानसभा यानी 119 विधानसभाओं में रैली की तैयारी शुरू कर दी है। पहले स्ट्रीट कॉर्नर मीटिंग में भी सब विधानसभा को कवर किय गया था। इस महीने से बीजेपी के सीनियर नेताओं की भी तेलंगाना में रैली शुरू हो जाएगी। कई केंद्रीय मंत्रियों की रैली होगी। बीजेपी के मुताबिक ऐसी कम से कम 10 बड़ी रैली करने की तैयारी है और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली होगी। अभी बीजेपी तेलंगाना के हर जिले में जिला स्तर की मीटिंग और कार्यकर्ताओं का ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रही है। कार्यकर्ताओं को बताया जा रहा है कि किस तरह लोगों को केंद्र सरकार की स्कीम के बारे में और तेलंगाना को लेकर बीजेपी के विजन के बारे में बताना है। 9 से 11 मार्च तक बीजेपी तेलंगाना में शक्ति केंद्रों की मीटिंग करेगी। चार या पांच बूथों को मिलाकर एक शक्ति केंद्र बनता है।

हर बूथ पर मीटिंग करेगी बीजेपी
तरुण चुग ने कहा कि शक्ति केंद्रों की मीटिंग में राष्ट्रपति का अभिभाषण सुनाएंगे जिससे सभी को इसकी स्पष्टता रहे कि केंद्र सरकार ने किस तरह हर तबके तक लाभ पहुंचाने के लिए स्कीम बनाई और उन्हें सफलतापूर्वक लागू किया। इस मीटिंग में कार्यकर्ताओं के बूथ में जाने की तारीखें भी तय की जाएंगी। राज्य भर के 34 हजार बूथों में 11 से 21 मार्च के बीच बैठकें होंगी। चुग ने कहा कि तेलंगाना के चुनाव में केसीआर का अहंकार, करप्शन, परिवारवाद तो बड़ा मुद्दा रहेगा ही साथ ही केसीआर सरकार के अधूरे वादे और असफल योजनाओं के बारे में भी हम घर घर जाकर लोगों को बताएंगे। उन्होंने कहा कि दलित बंधु से लेकर किसान, महिलाओं और युवाओं को जो भी वादे किए गए थे उसमें केसीआर सरकार पूरी तरह फेल रही।

    बीजेपी तेलंगाना में अपना पूरा दम लगा रही है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी सिर्फ एक ही सीट जीत पाई थी। लेकिन ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में सफलता के बाद बीजेपी को तेलंगाना में अपने लिए संभावनाएं दिखने लगी। पिछले चुनाव में केसीआर की अगुवाई वाली बीआरएस (पहले नाम टीआरएस) ने 119 में से 88 सीटें जीती थी। कांग्रेस को तब 19 सीटें मिली थी।

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