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Noida में Suicide की कोशिश तो America से फोन कैसे आ जाता है? Facebook के पास क्या कोई ‘संजय’ है

नई दिल्ली: महाभारत में संजय का किस्सा आपने भी पढ़ा होगा। उन्हें दिव्य दृष्टि मिली थी। उन्होंने धृतराष्ट्र को युद्ध का सजीव वर्णन सुनाया था। क्या फेसबुक के पास भी ऐसे कोई ‘संजय’ हैं? यह सवाल इसलिए क्योंकि हाल में आपने एक खबर पढ़ी होगी कि फेसबुक लाइव कर नोएडा में सुसाइड करने जा रहे छात्र को बचाने के लिए अमेरिका से फोन आया था। कुछ ही देर में नोएडा पुलिस उस लड़के के कमरे तक पहुंच गई। इस लड़के ने मच्छर मारने वाली शीशी में पानी भरकर पीने की एक्टिंग की थी। हालांकि इस तरह कई बार सुसाइड के प्रयासों को सफलतापूर्वक रोका जा सका है। ऐसे में आपके मन में भी यह सवाल उठ सकता है कि करीब 12000 किमी से भी ज्यादा दूर अमेरिका के ऑफिस में बैठे किसी ‘संजय’ को कैसे पता चल जाता है कि नोएडा में कोई लड़का सुसाइड करने जा रहा है? फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने इसके लिए पूरी व्यवस्था कर रखी है।


कंपनी की ‘मशीन लर्निंग’ कुछ इस तरह से है कि दुनिया में जहां भी खुद को नुकसान पहुंचाने या सुसाइड वाला कॉन्टेंट पोस्ट होता है, फौरन मैसेज जनरेट हो जाता है। हालांकि इस टेक्नोलॉजी का उसी देश या स्टेट के लिए इस्तेमाल किया जाता है जहां कंपनी को इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। इसका फायदा यह होता है कि समय पर मदद पहुंचाई जा सकती है। यह तकनीक पैटर्न को पकड़ती है जैसे कोई शब्द या चिंता वाली बात जिसमें परेशानी समझ में आए। मेटा ने सेफ्टी सेंटर नामक अपने पेज पर बताया है कि वह आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करती है जिससे इंसानी टीम के सामने प्राथमिकता के आधार पर पोस्ट, वीडियो या लाइव स्ट्रीम जांच के लिए रखा जा सके। AI इतना तेज है कि जांचकर्ता को फौरन बताता है कि कौन सा पोस्ट देखना ज्यादा जरूरी है। जैसे अगर कोई लाइव होकर कुछ कर रहा है मतलब इमर्जेंसी वाली स्थिति है तो उस बात को एआई कर्मचारी तक पहले रखता है। इसमें स्पीड काफी अहम होती है।

अमेरिका में फेसबुक के दफ्तर में क्या होता है?

एआई के सुझाव को देखने के बाद टीम फौरन तय करती है कि कहां और कैसे लोकल इमर्जेंसी टीम को सूचना देनी है। यहां जान लीजिए कि मार्च 2022 में यूपी पुलिस ने मेटा के साथ एक समझौता किया है। मेटा ही फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी है। इस एग्रीमेंट के तहत सुसाइड या खुद को किसी तरह के नुकसान से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट की जानकारी रीयल टाइम यूपी पुलिस को मिलती है। उस रात भी यही हुआ था। इस समझौते से यूपी में कई जिंदगियां बचाई जा सकी हैं।

26 अप्रैल को आधी रात 1.30 बजे के करीब गौतमबुद्ध नगर पुलिस मुख्यालय के पास सूचना आई थी कि एक लड़का सुसाइड वीडियो बना रहा है। मेटा मुख्यालय ने उस लड़के की लोकेशन ढूंढने में भी मदद की थी। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले स्टूडेंट ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था।

अमेरिका से नोएडा तक की कहानी

जैसे ही इनपुट मिला स्थानीय पुलिस स्पॉट पर पहुंची और लड़के को ढूंढ लिया। हालांकि उस लड़के ने ज्यादा दर्शक पाने के लिए ऐसी हरकत की थी। रूल के तहत लड़के की मेडिकल जांच की गई। काउंसिलिंग के बाद लड़के को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। इससे पहले 18 मार्च को नोएडा में ही एक 20 साल के शख्स ने इंस्टाग्राम पर तस्वीर पोस्ट कर लिखा था, ‘सब कुछ खत्म हो जाएगा।’ तस्वीर में फंदा भी दिख रहा था। मेटा के अलर्ट पर यूपी पुलिस ने उस लड़के को बचा लिया था।

एक अधिकारी ने कुछ समय पहले बताया था कि अगर कोई व्यक्ति फेसबुक या इंस्टाग्राम पर सुसाइड या खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाला पोस्ट करता है तो अमेरिका में मेटा हेडक्वॉर्टर फौरन यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर को अलर्ट भेजता है। अमेरिका से फोन और ईमेल भी आता है।

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