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आगरा का वो पनवारी कांड… जिसमें 34 साल बाद आया फैसला, 80 में 36 दोषी; 27 की हो चुकी है मौत

उत्तर प्रदेश के आगरा के चर्चित पनवारी कांड में 34 साल के बाद कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया. आगरा का एक ऐसा कांड जिसकी गूंज उन दिनों चारों ओर सुनाई दी थी. आगरा में हुए बबाल की गूंज दिल्ली तक भी पहुंची थी, इस मामले को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी तक आगरा आए थे. चर्चित पनवारी कांड के बाद फैली हवा अकोला तक पहुंची थी और बुधवार को उसी मामले में आगरा कोर्ट ने साक्ष्यों की सुनवाई कर अपना फैसला सुनाया, जिसमें 36 आरोपियों को कोर्ट में दोषी करार दिया. जातीय संघर्ष पनवारी कांड के दौरान आगरा में कर्फ्यू लगाया गया था.

आगरा के थाना सिकंदरा क्षेत्र के गांव पनवारी में जून 1990 में जातीय संघर्ष इस कदर भड़का कि आगजनी तक हुई. आरोप लगा था कि जून 1990 को गांव पनवारी में अनुसूचित जाति के परिवार की बेटी की बरात चढ़ाने को लेकर विवाद हुआ था, जिसने दंगा का रूप ले लिया. जातीय संघर्ष चिंगारी फैलने लगी, जो अकोला तक पहुंच गई. उस समय दंगा बबाल हुआ था. इस मामले में एससी एसटी स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत ने सारे साक्ष्य और गवाहों की गवाही के बाद बुधवार को अपना फैसला सुनाया. अदालत ने 36 आरोपियों को दोषी माना है. 15 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया. 30 मई को कोर्ट में दोषियों की सजा पर सुनवाई होगी .

मामले में आगरा कोर्ट 30 मई को सजा सुनाएगी

घटनाक्रम 21 जून 1990 की है, जब सिकंदरा के गांव पनवारी निवासी जाटव समाज की बेटी की शादी थी. आरोप लगा कि जाट समाज के लोगों ने दलित समाज के बरात चढ़त का विरोध किया था. इस कारण बरात नहीं चढ़ सकी. देखते ही देखते विवाद ने जातीय संघर्ष का रूप ले लिया और दंगे होने लगे. संघर्ष के बाद गांव से लेकर शहर तक हिंसा भड़क गई थी. इस दंगे की आग अकोला तक पहुंच गई थी. जातीय संघर्ष को देखते हुए आगरा में कर्फ्यू लगाया गया था. स्थिति को काबू करने के लिए पुलिस और पीएसी बल को भी लगाया गया था.

आगरा कोर्ट ने 34 साल के बाद चर्चित पनवारी कांड में अपना फैसला सुनाया है. पनवारी कांड की प्रतिक्रिया अकोला में दिखाई दी थी, जिसको लेकर मुकदमा दर्ज हुआ. जिसमें 80 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. जिसमें से 27 लोगों की मौत हो चुकी है. इस मामले में कोर्ट ने 36 लोगो को दोषी पाया है, जबकि 15 को बरी कर दिया गया है. आरोपियों पर 147, 148, 149 सहित एससी एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया था. अब आगरा कोर्ट द्वारा 30 मई को सजा सुनाई जाएगी.

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