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तो इसलिए हो रही है फारेंन करेंसी की किल्लत, हर महीने 2 बिलियन डॉलर उड़ा रहे हैं भारतीय सैर सपाटे पर

नई दिल्ली: कोरोना काल में लोगों का घूमना-फिरना बंद हो गया था। भारत सहित कई देशों में ट्रैवल पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। कोरोना के मामले कम होने के साथ इन पाबंदियों में ढील दी गई और लोगों ने दोबारा घूमना-फिरना शुरू कर दिया। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारतीयों (Indian) ने पिछले 9 महीनों में जमकर ट्रैवल किया है। इस दौरान भारतीयों ने विदेश घूमने (Travel Abroad) में 10 अरब डॉलर से ज्यादा रुपये खर्च कर दिए हैं। ऐसे में कहीं इसलिए ही तो फारेंन करेंसी की किल्लत नहीं हो रही है? भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 8.319 अरब डॉलर की गिरावट आई है। यह बीते 10 माह की सर्वाधिक है। 10 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 566.948 अरब डॉलर रह गया। यह एक अप्रैल, 2022 के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। अक्टूबर, 2021 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 645 अरब डॉलर के उच्चस्तर पर पहुंचा था।

दिसंबर महीने में खूब घूमे भारतीय

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में भारतीयों ने अकेले दिसंबर महीने में ट्रैवल पर 1,137 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। वहीं एजूकेशन, रिश्तेदारों को गिफ्ट आदि पर खर्च की गई विदेशी मुद्रा को देखें तो भारतीयों ने चालू वित्त वर्ष के दौरान करीब 19,354 मिलियन डॉलर भेजे हैं। यह पूरे FY22 में विदेश भेजे गए $19,610 मिलियन के करीब है, जो एक रेकॉर्ड वर्ष था। वित्तीय वर्ष 2018 तक भेजे गए एक अरब डॉलर से कम के कुल मासिक औसत की तुलना में भारतीय अब करीब 2 अरब डॉलर खर्च कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2012 में 35% की तुलना में वित्त वर्ष 23 में ट्रैवल की हिस्सेदारी 51% तक बढ़ी है। ईटी की खबर के मुताबिक, भारतीयों ने वित्त वर्ष 2022-23 के पहले नौ महीनों के दौरान विदेश यात्रा (Travel Abroad) पर करीब 10 अरब डॉलर खर्च किए, जो किसी भी पूरे वित्तीय वर्ष से ज्यादा है। किसी भी वित्तीय वर्ष में अगर देखें तो ट्रैवल में सबसे ज्यादा खर्च वित्त वर्ष 20 में कोरोना काल से पहले था, जब भारतीयों ने विदेश घूमने पर करीब 7 बिलियन डॉलर खर्च किए थे।


रिश्तेदारों पर कम पैसे खर्च कर रहे

भारतीय घूमने-फिरने के साथ खानेपीने में खूब पैसे खर्च कर रहे हैं। ट्रैवल खूब कर रहे हैं। लेकिन भारतीय विदेश में रह रहे रिश्तेदारों पर कम खर्च कर रहे हैं। इक्विटी में निवेश के लिए विदेशों में भेजे जाने वाले डॉलर की राशि पिछले पांच वर्षों से करीब 10 अरब डॉलर सालाना पर स्थिर रही है। वित्त वर्ष 2023 में शिक्षा के लिए विदेश भेजे गए रुपयों की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। बैंकरों को उम्मीद है कि मौजूदा तिमाही में इसमें इजाफा देखने को मिल सकता है। हालांकि ऐसी भी संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में ट्रैवल में और तेजी देखने को मिल सकती है। लोग पहले की तुलना में जमकर ट्रैवल कर रहे हैं।

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